मंगलवार, 9 नवंबर 2010

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धन्‍यवाद

संपादक : अनवारे इस्‍लाम 

वेब वर्क : पंकज सुबीर

4 टिप्पणियाँ:

वन्दना ने कहा…

शुक्रिया जल्द ही पढूंगी।

Devi Nangrani ने कहा…

Yeh sukhanwar ke udaan jo ise videsh ke pravasi sahitykaron se robaroo karti hai, bahut hi abhibhoot kari hai. Shree Anware ji ko v har dil azai Subeer ji ko iske liye bahut bahut badhayi

गीतिका गोयल ने कहा…

सुखनवर का नया अंक देखने का सुख प्राप्त हुआ. बहुत अच्छा लगा यह देख कर कि आप इस पत्रिका के प्रकाशन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं.
आजकल बहुत कम पत्रिकाएं ऐसी हैं जिनको खोलने के बाद पढ़ने की भी इच्छा होती हो. सुखनवर को खोला (वर्चुअली) तो पेज-दर-पेज खोलती गयी.
लम्बी रचनाएं तो अभी नहीं पढ़ पाई हूँ, पर हाँ, आपका संपादकीय और कुछ कवितायेँ ज़रूर पढीं. अच्छा संकलन है, चुनी हुई नज़्मों और कविताओं का. बधाई!!
संतोष चौबे जी की कविता पढ़ने के बाद और कुछ पढ़ने की इच्छा नहीं हुई क्योंकि मन उस संवेदना से बाहर निकलना ही नहीं चाहता था, बेहद सुन्दर कवता है! संतोषजी को विशेष आभार, इतनी सुन्दर रचना के लिए.

एक छोटा सा विचार था जिसे आपके समक्ष रखना उचित समझती हूँ. यदि प्रकाशित रचनाकारों के चित्रों को कुछ और अच्छा बनाया जा सके पत्रिका की साज-सज्जा और भी सुन्दर बन पड़ेगी.
आवरण चुनिन्दा हैं, सभी अंकों के.
कुल मिलाकर- 'दोबारा पढ़ना चाहूंगी'.

आप मेरे चित्र और मेरे बारे में कुछ जानकारी मेरी वेब साईट से ले सकते हैं. मैं चित्र बनाने के अलावा बच्चों के लिए कहानियां लिखती हूँ और खुद के लिए कवितायेँ. आपको भेजूंगी.
सीमाजी से जल्द-ही बात करूंगी. मेरा वेब साईट लिंक है-
www.magicreationsbygeetika.com

सादर
गीतिका गोयल

Dinesh pareek ने कहा…

अति उत्तम ,अति सुन्दर और ज्ञान वर्धक है आपका ब्लाग
बस कमी यही रह गई की आप का ब्लॉग पे मैं पहले क्यों नहीं आया अपने बहुत सार्धक पोस्ट की है इस के लिए अप्प धन्यवाद् के अधिकारी है
और ह़ा आपसे अनुरोध है की कभी हमारे जेसे ब्लागेर को भी अपने मतों और अपने विचारो से अवगत करवाए और आप मेरे ब्लाग के लिए अपना कीमती वक़त निकले
दिनेश पारीक
http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/