गुरुवार, 29 अप्रैल 2010

सुख़नवर पत्रिका का नया मार्च अप्रैल 2010 अंक आन लाइन पढि़ये या डाउनलोड कीजिये ।

सुख़नवर पत्रिका का मार्च अप्रैल अंक डाउनलोड करके पढ़ें नीचे दी गई लिंक से

http://www.divshare.com/download/11207443-73a

http://www.archive.org/details/SukhanwarMarchApril

सुख़नवर पत्रिका का मार्च अप्रैल अंक आनलाइन पढ़ने के लिये नीचे चित्र पर क्लिक करें ।

COVER-2010

10 टिप्पणियाँ:

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

डिजाइन आकर्षक है.

मुख्या टेक्स्ट/कवर टाइटल "सुख़नवर" पिंक कलर में है. इसे पत्रिका के मूल कलर और फॉण्ट में रखा जा सकता है

रचना पढ़ने के बाद आता हूँ.

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

मैंने तड़ातर कुछ ग़ज़लें पढ़ डाली. और पंकज सुबीर की कहानी "तुम लोग" पढ़ कर थोड़ी देर के लिए जड़ हो गया.
बहुत अच्छा लगा ये सुख़नवर का सफ़र.

सम्पादक महोदय अनवारे इस्लाम जी को बधाई.

PRAN SHARMA ने कहा…

SUKHANWAR KAA NAYAA ANK ACHCHHA
LAG RAHAA HAI.ABHEE TAK MAIN
JOAAO GVIMAREZ ROSS KEE KAHANI
" NADEE KAA TEESRA KINARA " ,
PANKAJ SUBEER KEE KAHANI " TUM
LOG " AUR DARWESH BHARTI,KANCHAN
CHAUHAN AUR ABDUSSLAAM KAUSAR KEE
GAZALEN PADH PAAYAA HOON.STARNIY
RACHNAAYEN HAIN.BADHAAEE AUR SHUBH
KAMNA.

निर्मला कपिला ने कहा…

पढ्ती हूँ फिर बताती हूँ मगर मुझे पढने मे अभी एक दो दिन लगेंगे अभी समय कम मिल रहा है। धन्यवाद और आशीर्वाद्

नीरज गोस्वामी ने कहा…

सुखनवर' पढ़ कर मज़ा आगया...पत्रिका क्या है गागर में सागर है...बेहतरीन ग़ज़लें लेख और कहानियां...वाह...कौसर और दरवेश साहब की ग़ज़लें दिल में बस गयीं...और आपकी कहानी...सुभान अल्लाह...ऐसे अनूठे जिंदादिल पात्र अब सिर्फ कहानियों में ही मिलते हैं...
बहुत बहुत शुक्रिया हम सबको दिए इस नायाब तोहफे के लिए.
नीरज

Udan Tashtari ने कहा…

डिज़ाईन अच्छी लगी...पत्रिका अब पढ़ने जा रहे हैं.

दीपक 'मशाल' ने कहा…

सुखनवर पत्रिका में साहित्य की लगभग हर वो विधा है जो एक साहित्यप्रेमी पाठक पढना चाहता है.. ये अंक भी बहुत ही पसंद आया, चाहे कहानी हो, ग़ज़ल, कविता हो, गीत या लघुकथा सभी का अपना अलग आनंद था.. इस बेहतरीन पत्रिका के लिए जनाब श्री अनवारे इस्लाम साहब का तहेदिल से आभारी हूँ.. कवर पेज भी अच्छा लगा..

seema gupta ने कहा…

सुखनवर पत्रिका की प्रति आज ही मिली, साहित्य के इतने रंग समेटे ये पत्रिका बेहद रोचक और अच्छी लगी. कितनी नई , ग़ज़ल, कविता और कहानिया पढने को मिली.श्री अनवारे इस्लाम साहब जी का दिल से आभार

regards

Kavi Kulwant ने कहा…

ek achchi magazine...

Kavi Kulwant ने कहा…

ek achchi magazine...